Thursday, 21 August 2014

खोल गया था खून जब सुनी सम्राट
की कहानी थी,
अफगानिस्तान में उन्हें अब
लिखनी नयी कहानी थी।
जोर इतना था किसमें जो इस
राणा को रोक पाता,
तोङ जंजीर तिहाङ
की वो जा अफगानिस्तान भागा।
अब ले आया था वो सम्मान पुराना,
देश को हैं ये पैगाम सुनाना।
क्या हैं देखा किसीने ऐसा कैदी,
वापस आकर जिसने खुद बेङी लेली।
पर स्वतंत्र भारत मे कैसा हुआ ये न्याय,
इस राणा पर हीं आज कर दिया अन्याय।
बोल गया था उस क्षण शेर का रक्त,
जब सुने थे उसने फूलन के शब्द।
क्या किया गुनाह जब फूलन को मारा,
कम से कम बेगुनाहों को तो पार लगाया।
आज जान लो है अब क्या होने वाला,
हर बेगुनाह इस देश में अब हैं कटने वाला।
भोग रहा है जो सजा वो नहीं कोई आम,
कुछ समय में अब होने वाला सबका काम तमाम।
हो जायें प्रलय चाहें आंधी और तूफान,
अब नहीं रुकेगा चल पङा जो नया सैलाब।
खुशकिस्मत थे वो क्रांतिकारी भगतसिंह
जिनके साथ थे,
नागवार हम भी नहीं शेरसिंह के राज में।
फैला दो ये समाचार अब होंगे नहीं हम हलाल,
मर जायेंगे देश पर मगर नहीं करेंगे मलाल।

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