Monday, 4 August 2014


बिन हाथ लगाया दरद जाणग्या
परची मोटी करी तय्यार
जाँच कराई बार लेब सूँ
रपट पढी ना एक भी बार
सात-आठ एक गोळ्याँ लिख दी
पीवण री शीश्याँ दी चार
ठीक हुयो तो महिमा थाँरी
मरग्यो तो मालिक री मार
अजब लगावो मजमो थाँरी धुर्र बोलूँ
थाँने डाकटर बतळाऊँ या मदारी बोलूँ

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