बिन हाथ लगाया दरद जाणग्या परची मोटी करी तय्यार जाँच कराई बार लेब सूँ रपट पढी ना एक भी बार सात-आठ एक गोळ्याँ लिख दी पीवण री शीश्याँ दी चार ठीक हुयो तो महिमा थाँरी मरग्यो तो मालिक री मार अजब लगावो मजमो थाँरी धुर्र बोलूँ थाँने डाकटर बतळाऊँ या मदारी बोलूँ
No comments:
Post a Comment