Saturday, 30 November 2013

अब भी क्षत्रिय तुम उठते नहीं फिर आखिर उठके करोगे क्या ?
वीरों का जीना जीते नहीं बकरों की मौत मरोगे क्या ?
जौहर की ज्वाला धधकेगी पानी में डूब मरोगे क्या ?

युग पलटा है प्रणाली पलटी रोना पलटा हुंकारों में
पानी जो गया पातालों में अब पलटेगा तलवारों में
पलटे दिन की रणभेरी है उसको अनसुनी करोगे क्या ?

युग युग से हुंके उठती है चितौड़ दुर्ग दीवारों से
हिन्दू क्या रोते पृथ्वी रोती आंसू पड़ते तारों से
वे केसरिया बन जूझे थे तुम पीठ दिखा भागोगे क्या ?

शक्ति शौर्य जो पास नहीं तो विजय नहीं जयकारों में
निर्बल की नैया डगमग करती दोष कहाँ पतवारों में
अब बाहूबल संचित करने भी धीरे कदम रखोगे क्या ?

शिवी ने शरणागत खग को बचाने मांस निज काट दे दिया था। 
गौरक्षा हित तेरा पूर्वज स्वयं समर्पित हो गया था। 
अब मरने की बेला आएगी आँखे बंद करोगे क्या ?

धर्म भ्रष्ट कर्तव्यहीन बन जग में भी जिवोगे क्या ?
अपने हाथों से घर जलवा कर रस्ते पर लौटोगे क्या ?
रे प्राण गए तो देह नाश से कभी बचा पावोगे क्या ?

गीदड धमकी से जो ङर जाये, वो राजपूत की संतान नहीं,
हम शेर हैं दुनिया के, शायद तुम्हें पहचान नहीं

कान खोल कर सुन ले दुश्मन, चेहरे का खोल बदल देंगे,
इतिहास की क्या हस्ती है, पूरा भूगोल बदलदेंगे ll"

राजपुत हुं राजपुताना चाहता हूं,
फिर से सबको एक बनाना चाहता हूं।

राज आपना वापस आये या ना आये,
लेकिन अपनी इज्जत वापस लाना चाहता हूं।।

ऐक बनो , नेक बनो .. ..
जुड गए तो सिंह (शेर) भी घबराएगा...

टुट गए तो गीदड भी सतायेगा।।

Friday, 29 November 2013

पारो ने कहा - शराब छोड़ दो,
पवार ने कहा - टमाटर खाना छोड़ दो,
चीनी खाना छोड़ दो, प्याज खाना छोड़ दो,
शीला ने कहा - बिजली जलाना छोड़ दो,
चिदंबरम ने कहा -सोना खरीदना छोड़ दो,
केजरीवाल ने कहा - बिल देना छोड़ दो,
मनमोहन ने कहा - या तो मुझे चोर कहना छोड़
दो या मुझे मंगल गृह पर छोड़ दो,
सोनिया ने कहा - सीने में दर्द है....कोई एम्स तक
छोड़ दो,
राहुल ने कहा - में कन्फ़्यूज़्ड हूँ अकेला छोड़ दो,
अध्यादेश फाड़ दो,
मोइली ने कहा - पेट्रोल भरवाना छोड़ दो,
शिन्दे ने कहा - मुसलमान आतंकियों को छोड़ दो,
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एक काम करो....तुम सारे मिलकर भारत छोड़ दो,
हो जायेगा भारत निर्माण!!
कोंगेस है एक बीमारी...जो फैला रही है
महामारी...जिसके लक्षण है घोटाले और बलात्कार

Sunday, 27 October 2013

बता राजस्थान "बाँ " थारी रीत कठै।
सीस कटियोड़ा धड़ लड़ रहया एड़ा पूत कठै।
गायां खातर गाँव गाँव मे बलिदानी जुंझार कठै।
फेरां सूं अधबीच मे उठतों "बो" पाबू राठौड़ कठै ।
कठै है अब "बा" भामाशाह साहूकार री रीत।
सुख दुख मे सब सागै रेवता बा मिनखा री प्रीत कठै।
मोठ बाजरा रो रोट ओर फोफलिया रो साग कठै।
मारवाड़ सू मेवाड़ तक गूंजता "बी" मीरां रा गीत कठै।
बता राजस्थान "बाँ " थारी रीत कठै।









पिंजरा लोहे का हो या सोने का क्या फर्क पड़ता है?
कांग्रेस लाओ या बीजेपी लाओ कोई फर्क नही पड़ता।
जब तक आप को आजादी का मतलब समझ ना आये तब तक सिर्फ पिंजरा बदलते रहने का क्या फायदा।
आजादी का मतलब सही मायने में समझो और देश बचाओ ।
तभी जा कर हमारे समाज और देश का उद्धार हो सकता है।

तूफान में ताश का घर नहीं बनता, रोने से बिगड़ा मुकद्दर नहीं बनता ।
हौसला रखो दुनिया जितने का ,
एक हार से कोई फ़क़ीर और एक जीत से कोई सिकंदर नहीं बनता ।।






!!"राजपूत है हम"!!
कहते तो हम सब है की राजपूत है हम ,
मानवता की लाज बचाने वाले हिन्द के 
वो सपूत है हम ।

पर वो क्षत्रियोचित सँस्कार अब कँहा है ।
वो राणा और शिवाजी की तलवार अब कँहा है॥

बेटे तो हम उन मर्यादापुरुषोत्तम राम
के वँश के है ।
और राणा शिवाजी और दुर्गा दास जी के
अँश के है ॥

तो फिर राम का मर्यादित जीवन अब कँहा है ।
राणा और दुर्गादास जी के जैसी लगन अब कँहा हैँ ॥

दानी कर्ण और राजा शिवी का नाम हम लेते है ।
भागिरथ और सत्यवादी हरिश्चन्द्र की साख हम
दूनियाँ को देते है॥

तो फिर भागिरथ जैसा तप अब कँहा है ।
झुकाया था भगवान को सत्य के आगे वो
सत्य का अवलम्ब अब कँहा है ।

हमेँ गर्व है की हम शर कटने पे भी लङते थे ।
खेल खेल मेँ ही हमारे वीर जँगली शेरो से अङते थे।

जिस सत के सहारे धङ लङते थे वो सत
अब कँहा है ।
आज वो हजार हाथीयोँ का अथाह बल
अब कँहा है।

सतयुग, त्रेता और द्वापर तो क्षत्रियोँ के स्वर्ण युग रहै ।
कलयुग मे भी आज तक क्षत्रिय श्रेष्ठ रहे चाहै
उन्होने कठिन कष्ठ सहै ॥

पर सोचना तो हमे है जो क्षत्रिय धर्म
और सँस्कार भूल रहै ।
देख रहा हुँ आज शेर भी गीदङो की
गुलामी कबूल रहै है

अब तो ईस राख मे छुपे अँगारे
को जगा लो साथियोँ ।
जिस धर्म ने महान बनाया हमे
उसे अपनालो साथियोँ ।
जय क्षत्रिय ॥
जय क्षात्र धर्म ॥














क्षत्रिय हुँ, रुक नहीँ सकता ।
क्या है ये तुफान, इन्द्र का वज्र
आ जाये तो भी झुक नहीँ सकता ॥

मत करो झुठी कल्पना की मे डर जाउँगा ।
श्री राम का वँशज हुँ एक रावण तो क्या, 
हजारो का सामना भी कर जाउँगा ॥

थोङा सा सिलसिला रुक क्या गया बलिदान का ।
पुरा का पुरा कुटुम्ब उठ खङा हो गया शैतान का॥

अरे हम वो है जिन्होने शरणागत
कबुतर को भी बचाया था ।
और कुँभकरण जैसे राक्षश को भी
अपने बाणो पे नचाया था॥

माता सीता के सत के तिनके
ने रावण को डरा दिया ।
और द्रोपदी के तप ने दुश्शासन
को भरी सभा मे हरा दिया ॥

अरे हम आज भी वो ही छ्त्रपति
शिवाजी के शेर है ।
बस भूल गये है अपने क्षात्र धर्म को
बस उसे अपनाने की ही देर हैँ ॥

Saturday, 26 October 2013

कठे गया बे राजपुत कठे गयी बा रजपूताई।
शिर कटता अर धङ लङता एसा हा म्हारा भाई।
आज समाज पर सँकट आयो तो म्हाने याद आई।
पन्ना धाय ओर राणी झाँसी री लक्ष्मी बाई।
समय समय की बात है और समय समय का खेल।
सँसकार अपने भूले हम और रहा ना आपस मे मेल।
जिनको हमने अपना माना और जिनपे अपनी जान लूटाई।
वो हि हमको आँख दिखाते करते जग मे हमारी हँसाई।
हिमालय की सी शान हमारी ,दुनिया ने ईसको माना है।
हजारे क्षत्राणीया जोहर मे कुदी,सतियो के सत को हमने जाना है।
क्षत्रिय और राजपूत कहलाने वालो आज हमे धिक्कार है।
दासी को जोधा बता जग को हँसाते देखो आज यँहा मक्कार है।
आज हमे क्षत्रिय रँग मे आके क्षत्रत्वबताना होगा।
बन्द कर दो झुठी कहानी वरना बहूत पछताना होगा।
आज हमे तलवार की नही साथ रहने की जरुरत है।
एक हो जाओ मेरे राजपूत भाईयो ये ही अब शुभ मुहरर्त है॥

Friday, 25 October 2013

    
                                             गीदड़ धमकी से जो ड़र जाये ,                                                     वो राजपुत की संतान नही ।                                             हम शेर है दुनिया के .                                                      शायद तुम्हेँ पहचान नही ।                                            कान खोलकर सुन लो दुशमनो,                                                       चेहरे का खोल बदल देँगे ।                                            इतिहास की क्या हस्ति है ,                                                         पुरा भूगोल बदल देँगे ।

Wednesday, 23 October 2013

नई दिल्ली के बारे में रोचक तथ्य 
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1. 1947 में जब भारत को स्वतंत्रता मिली तो “नई दिल्ली” (New Delhi) को पूर्ण स्वतंत्रता न देकर सीमित स्वतंत्रता दी गई थी।
2. 1956 में दिल्ली केन्द्रशासित प्रदेश बना।
3. नई दिल्ली का नियन्त्रण “नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल” के द्वारा किया जाता है जबकि शेष दिल्ली का नियन्त्रण “म्युनिसिपल कार्पोरेशन, दिल्ली” के द्वारा किया जाता है।
4. दिल्ली का कुतुब मीनार प्रस्तर निर्मित संसार की सबसे बड़ी मीनार है।
5. दिल्ली में स्थित खारी बावली एशिया का सबसे बड़ा मसालों (spice) का थोक बाजार है।
6. दिसम्बर 1911 में जब अंग्रेजों ने अपनी राजधानी को कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) से दिल्ली स्थानान्तरित किया तो उन्होंने दिल्ली से लगा हुआ “नई दिल्ली” (New Delhi) नामक एक नया शहर बनाने का निश्चय किया। “नई दिल्ली” नामक इस नये शहर बनना 1931 में पूर्ण हुआ और इसी कारण से पहले से बसा हुआ शहर दिल्ली के स्थान पर “पुरानी दिल्ली” कहलाने लगा।
जंग खाई तलवार से युद्ध नही लड़े जाते,
लंगडे घोड़े पे दाव नही लगाये जाते,
वीर तो लाखों होते है पर सभी महाराणा प्रताप नही होते ,
पूत तो होते है धरती पे सभी... पर सभी “राजपूत” नही होते..!!