कठे गया बे राजपुत कठे गयी बा रजपूताई।
शिर कटता अर धङ लङता एसा हा म्हारा भाई।
आज समाज पर सँकट आयो तो म्हाने याद आई।
पन्ना धाय ओर राणी झाँसी री लक्ष्मी बाई।
समय समय की बात है और समय समय का खेल।
सँसकार अपने भूले हम और रहा ना आपस मे मेल।
जिनको हमने अपना माना और जिनपे अपनी जान लूटाई।
वो हि हमको आँख दिखाते करते जग मे हमारी हँसाई।
हिमालय की सी शान हमारी ,दुनिया ने ईसको माना है।
हजारे क्षत्राणीया जोहर मे कुदी,सतियो के सत को हमने जाना है।
क्षत्रिय और राजपूत कहलाने वालो आज हमे धिक्कार है।
दासी को जोधा बता जग को हँसाते देखो आज यँहा मक्कार है।
आज हमे क्षत्रिय रँग मे आके क्षत्रत्वबताना होगा।
बन्द कर दो झुठी कहानी वरना बहूत पछताना होगा।
आज हमे तलवार की नही साथ रहने की जरुरत है।
एक हो जाओ मेरे राजपूत भाईयो ये ही अब शुभ मुहरर्त है॥
शिर कटता अर धङ लङता एसा हा म्हारा भाई।
आज समाज पर सँकट आयो तो म्हाने याद आई।
पन्ना धाय ओर राणी झाँसी री लक्ष्मी बाई।
समय समय की बात है और समय समय का खेल।
सँसकार अपने भूले हम और रहा ना आपस मे मेल।
जिनको हमने अपना माना और जिनपे अपनी जान लूटाई।
वो हि हमको आँख दिखाते करते जग मे हमारी हँसाई।
हिमालय की सी शान हमारी ,दुनिया ने ईसको माना है।
हजारे क्षत्राणीया जोहर मे कुदी,सतियो के सत को हमने जाना है।
क्षत्रिय और राजपूत कहलाने वालो आज हमे धिक्कार है।
दासी को जोधा बता जग को हँसाते देखो आज यँहा मक्कार है।
आज हमे क्षत्रिय रँग मे आके क्षत्रत्वबताना होगा।
बन्द कर दो झुठी कहानी वरना बहूत पछताना होगा।
आज हमे तलवार की नही साथ रहने की जरुरत है।
एक हो जाओ मेरे राजपूत भाईयो ये ही अब शुभ मुहरर्त है॥
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