Friday, 27 May 2016

*"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"*
पानी में गुड डालिए,
बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए,
अच्छे हों हालात!!
धनिया की पत्ती मसल,
बूंद नैन में डार!
दुखती अँखियां ठीक हों,
पल लागे दो-चार!!
ऊर्जा मिलती है बहुत,
पिएं गुनगुना नीर!
कब्ज खतम हो पेट की,
मिट जाए हर पीर!!
प्रातः काल पानी पिएं,
घूंट-घूंट कर आप!
बस दो-तीन गिलास है,
हर औषधि का बाप!!
ठंडा पानी पियो मत,
करता क्रूर प्रहार!
करे हाजमे का सदा,
ये तो बंटाढार!!
भोजन करें धरती पर,
अल्थी पल्थी मार!
चबा-चबा कर खाइए,
वैद्य न झांकें द्वार!!
प्रातः काल फल रस लो,
दुपहर लस्सी-छांस!
सदा रात में दूध पी,
सभी रोग का नाश!!
दही उडद की दाल सँग,
पपीता दूध के संग!
जो खाएं इक साथ में,
जीवन हो बदरंग!!
प्रातः- दोपहर लीजिये,
जब नियमित आहार! तीस मिनट की नींद लो,
रोग न आवें द्वार!!
भोजन करके रात में,
घूमें कदम हजार!
डाक्टर, ओझा, वैद्य का ,
लुट जाए व्यापार !!
देश,भेष,मौसम यथा,
हो जैसा परिवेश!
वैसा भोजन कीजिये,
कहते सखा सुरेश!!
इन बातों को मान कर,
जो करता उत्कर्ष!
जीवन में पग-पग मिले,
उस प्राणी को हर्ष!!
घूट-घूट पानी पियो,
रह तनाव से दूर!
एसिडिटी, या मोटापा,
होवें चकनाचूर!!
अर्थराइज या हार्निया,
अपेंडिक्स का त्रास!
पानी पीजै बैठकर,
कभी न आवें पास!!
रक्तचाप बढने लगे,
तब मत सोचो भाय!
सौगंध राम की खाइ के,
तुरत छोड दो चाय!!
सुबह खाइये कुवंर-सा,
दुपहर यथा नरेश!
भोजन लीजै रात में,
जैसे रंक सुरेश!!
देर रात तक जागना,
रोगों का जंजाल!
अपच,आंख के रोग सँग,
तन भी रहे निढाल!!
टूथपेस्ट-ब्रश छोडकर,
हर दिन दोनो जून!
दांत करें मजबूत यदि,
करिएगा दातून!!
हल्दी तुरत लगाइए,
अगर काट ले श्वान!
खतम करे ये जहर को,
कह गए कवि सुजान!!
मिश्री, गुड, खांड,
ये हैं गुण की खान!
पर सफेद शक्कर सखा,
समझो जहर समान!!
चुंबक का उपयोग कर,
ये है दवा सटीक!
हड्डी टूटी हो अगर,
अल्प समय में ठीक!!
दर्द, घाव, फोडा, चुभन,
सूजन, चोट पिराइ!
बीस मिनट चुंबक धरौ,
पिरवा जाइ हेराइ!!
हँसना, रोना, छींकना,
भूख, प्यास या प्यार!
क्रोध, जम्हाई रोकना,
समझो बंटाढार!!
सत्तर रोगों कोे करे,
चूना हमसे दूर!
दूर करे ये बाझपन,
सुस्ती अपच हुजूर!!
यदि सरसों के तेल में,
पग नाखून डुबाय!
खुजली, लाली, जलन सब,
नैनों से गुमि जाय!!
भोजन करके जोहिए,
केवल घंटा डेढ!
पानी इसके बाद पी,
ये औषधि का पेड!!
जो भोजन के साथ ही,
पीता रहता नीर!
रोग एक सौ तीन हों,
फुट जाए तकदीर!!
पानी करके गुनगुना,
मेथी देव भिगाय!
सुबह चबाकर नीर पी,
रक्तचाप सुधराय!!
अलसी, तिल, नारियल,
घी सरसों का तेल!
यही खाइए नहीं तो,
हार्ट समझिए फेल!!
पहला स्थान सेंधा नमक,
पहाड़ी नमक सु जान!
श्वेत नमक है सागरी,
ये है जहर समान!!
तेल वनस्पति खाइके,
चर्बी लियो बढाइ!
घेरा कोलेस्टरॉल तो,
आज रहे चिल्लाइ!!
अल्यूमिन के पात्र का,
करता है जो उपयोग!
आमंत्रित करता सदा ,
वह अडतालीस रोग!!
फल या मीठा खाइके,
तुरत न पीजै नीर!
ये सब छोटी आंत में,
बनते विषधर तीर!!
चोकर खाने से सदा,
बढती तन की शक्ति!
गेहूँ मोटा पीसिए,
दिल में बढे विरक्ति!!
नींबू पानी का सदा,
करता जो उपयोग!
पास नहीं आते कभी,
यकृति-आंत के रोग!!
दूषित पानी जो पिए,
बिगडे उसका पेट!
ऐसे जल को समझिए,
सौ रोगों का गेट!!
रोज मुलहठी चूसिए,
कफ बाहर आ जाय!
बने सुरीला कंठ भी,
सबको लगत सुहाय!!
भोजन करके खाइए,
सौंफ, गुड, अजवान!
पत्थर भी पच जायगा,
जानै सकल जहान!!
लौकी का रस पीजिए,
चोकर युक्त पिसान!
तुलसी, गुड, सेंधा नमक,
हृदय रोग निदान!!
हृदय रोग, खांसी और
आंव करें बदनाम!
दो अनार खाएं सदा,
बनते बिगडे काम!!
चैत्र माह में नीम की,
पत्ती हर दिन खावे !
ज्वर, डेंगू या मलेरिया,
बारह मील भगावे !!
सौ वर्षों तक वह जिए,
लेत नाक से सांस!
अल्पकाल जीवें, करें,
मुंह से श्वासोच्छ्वास!!
सितम, गर्म जल से कभी,
करिये मत स्नान!
घट जाता है आत्मबल,
नैनन को नुकसान!!
हृदय रोग से आपको,
बचना है श्रीमान!
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक,
का मत करिए पान!!
अगर नहावें गरम जल,
तन-मन हो कमजोर!
नयन ज्योति कमजोर हो,
शक्ति घटे चहुंओर!!
तुलसी का पत्ता करें,
यदि हरदम उपयोग!
मिट जाते हर उम्र में,
तन के सारे रोग!

Thursday, 15 October 2015

ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना

,वो कमीज के बटन ऊपर नीचे लगाना
अपने बाल खुद न काढ पाना पी टी शूज को चाक से चमकाना

,,वो काले जूतों को पैंट से पोछते जाना 
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना ...          
                                                         ,,वो बड़े नाखुनो को दांतों से चबाना 
और लेट आने पे मैदान का चक्कर लगाना 
वो prayer के समय class में ही रुक जाना 
पकडे जाने पे पेट दर्द का बहाना बनाना 
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना ...
                                                        ,,वो टिन के डिब्बे को फ़ुटबाल बनाना 
ठोकर मार मार उसे घर तक ले जाना 
साथी के बैठने से पहले बेंच सरकाना 
और उसके गिरने पे जोर से खिलखिलाना 
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना ...
                                                     ,,गुस्से में एक-दूसरे की कमीज पे स्याही छिड़काना 
वो लीक करते पेन को बालो से पोछते जाना 
बाथरूम में सुतली बम पे अगरबती लगा छुपाना 
और उसके फटने पे कितना मासूम बन जाना 
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना ...
                                                        ,,वो Games Period के लिए Sir को पटाना 
Unit Test को टालने के लिए उनसे गिडगिडाना 
जाड़ो में बाहर धूप में Class लगवाना 
और उनसे घर-परिवार की बातें सुनते जाना 
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना ...
                                                          ,,वो बेर वाली के बेर चुपके से चुराना 
लाल –काला चूरन खा एक दूसरे को जीभ दिखाना 
जलजीरा , इमली देख जमकर लार टपकाना 
साथी से आइसक्रीम खिलाने की मिन्नतें करते जाना 
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना ...
                                                          ,,वो लंच से पहले ही टिफ़िन चट कर जाना 
अचार की खुशबूं पूरे Class में फैलाना 
वो पानी पीने में जमकर देर लगाना 
बाथरूम में लिखे शब्दों को बार-बार पढके सुनाना 
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना ...
                                                               ,,वो Exam से पहले गुरूजी के चक्कर लगाना 
बार – बार बस Important पूछते जाना 
वो उनका पूरी किताब में निशान लगवाना 
और हमारा पूरे Course को देख चकराना 
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना ...
                                                         ,,वो Farewell पार्टी के दिन पेस्ट्री समोसे खाना 
और जूनियर लड़के का ब्रेक डांस दिखाना 
वो टाइटल मिलने पे हमारा तिलमिलाना 
वो साइंस वाली मैडम पे लट्टू हो जाना 
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना ...
                                                        ,,वो मेरे स्कूल का मुझे यहाँ तक पहुचाना 
और मेरा खुद में खो उसको भूल जाना 
मेरा बाजार में किसी परिचित से टकराना
वो जवान गुरूजी का बूढ़ा चेहरा सामने आना ..

तुम सब अपने स्कूल एक बार जरुर जाना .....
दूध दही ने चाय चाटगी, फूट चाटगी भायाँ ने
इंटरनेट डाक ने चरगी, भैंस्या चरगी गायाँ ने

टेलीफून मोबाईल चरग्या, नरसां चरगी दायाँ ने
देखो मर्दों फैसन फटको, चरग्यो लोग लुगायाँ ने

साड़ी ने सल्वारां खगी, धोतीने पतलून खायगी
धर्मशाल ने होटल खागी, नायाँ ने सैलून खायगी

ऑफिस ने कम्प्यूटर खाग्या, 'मागी' चावल चून खायगी
कुवे भांग पड़ी है सगळे, सब ने पछुवा पून खायगी

राग रागनी फिल्मा खागी, 'सीडी' खागी गाणे ने
टेलीविज़न सबने खाग्यो, गाणे ओर बजाणे ने

गोबर खाद यूरिया खागी, गैस खायगी छाणे ने
पुरसगारा ने बेटर खाग्या, 'बफ्फे' खागी खाणे ने

चिलम तमाखू हुक्को खागी, जरदो खाग्यो बीड़ी ने
बच्या खुच्यां ने पुड़िया खाग्या, खाग्या साद फकीरी ने

गोरमिंट चोआनी खागी, हाथी खाग्यो कीड़ी ने
राजनीती घर घर ने खागी, भीड़ी खाग्यो भीड़ी ने

हिंदी ने अंग्रेजी खागी, भरग्या भ्रस्ट ठिकाणे में
नदी नीर ने कचरो खाग्यो, रेत गई रेठाणे में

धरती ने धिंगान्या खाग्या, पुलिस खायरी थाणे में
दिल्ली में झाड़ू सी फिरगी, सार नहीं समझाणे में

ढाणी ने सेठाणी खागी, सहर खायग्यो गांवां ने
मंहगाई सगळां ने खागी, देख्या सुण्या न घावां ने

अहंकार अपणायत खागी, बेटा खाग्या मावां ने
भावुक बन कविताई खागी, 'भावुक' थारा भावां ने

Saturday, 11 July 2015

ढूंढता रह ज्याओगा !!!!!!!!!!!!!! 

लुगाइयों का घाघरा, खिचड़ी का बाजरा,
सिरसम का साग, सिर पे पाग, 
औंगण में ऊखल, कूण म मूसल, 
घरां म लस्सी, लत्ते टांगण की रस्सी,
आग चूल्हे की, संटी बीन (दुल्हे) की, 
पहलवानां का लंगोट, हनुमानजी का रोट,
घूंघट आली लुगाई, गावं म दाई, 

ढूंढता रह ज्याओगा !!!!!!!!!!!!!! 

घरां म बुड्ढे, बैठकां म मुड्ढे,
बास्सी रोटी अर अचार, गली म घुमते लुहार, 
खांड का कसार, टींट का अचार, 
कांसी की थाली, डांगर के पाली, 
बीजणा नौ डांडी का, दूध दही घी हांडी का, 
रसोई म दरात, बालकां की स्याही की दावत, 
बटेऊआं की शान, बहुआं की आन,
ताऊ का हुक्का, ब्याह का रुक्का, 
पाटडे में नहाणा, पत्तल पे खाणा,
पाणी भरेडा देग, भाण-बेट्याँ रा नेग,

ढूंढता रह ज्याओगा !!!!!!!!!!!!!!

Tuesday, 16 June 2015

ऊँचा-ऊँचा धोरा अठै, लाम्बो रेगिस्तान।
कोसां कोस रुंख कोनी, तपतो राजस्थान।।
फोगला अर कैर अठै, करै भौम पर राज।
गोडावण रा जोङा अठै, मरुधर रा ताज।।
कुंवा रो खारो पाणी, पीवै भैत मिनख।
मेह रो पालर पाणी, ब्होत जुगत सूं रख।।
कोरी कोरी टीबङी, उङै रेत असमान।
सणसणाट यूं बाज रही, जणुं सरगम रा गीत।।
सोनै ज्यूं चमके रेत, चाँदनी रातां में।
रेत री महिमा गावै, चारण आपरी बातां में।।
इटकण मिटकण दही चटोकण, खेलै बाल गोपाल अठै।
गुल्ली डंडा खेल प्यारा, कुरां कुरां और कठै।।
अरावली रा डोंगर ऊंचा, आबू शान मेवाङ री।
चम्बल घाटी तिस मिटावै, माही जान मारवाङ री।।
हवेलियाँ निरखो शेखावाटी री, जयपुर में हवामहल।
चित्तौङ रा दुर्ग निरखो, डीग रा निरखो जलमहल।।
संगमरमर बखान करै, भौम री सांची बात।
ऊजळै देश री ऊजळी माटी, परखी जांची बात।।
धोरा देखो थार रा, कोर निकळी धोरां री।
रेत चालै पाणी ज्यूं, पून चालै जोरां री।।
भूली चूकी मेह होवै, बाजरा ग्वार उपजावै।
मोठ मूँग पल्लै पङे तो, सगळा कांख बजावै।।
पुष्कर रो जग में नाम, मेहन्दीपुर भी नाम कमावै।
अजमेर आवै सगळा धर्मी, रुणेचा जातरु पैदल जावै।।
रोहिङै रा फूल भावै, रोहिङो खेतां री शान।
खेजङी सूँ याद आवै, अमृता बाई रो बलिदान।।
सोने री धरती अठै, चांदी रो असमान।
रंग रंगीलो रस भरियो, ओ म्हारो राजस्थान।।
रंग-रंगीलो राजस्थान, नाज करै है देस।
न्यारी-न्यारी बोली अठैगी, न्यारा-न्यारा भेस।।
राणा जेङो वीर अठै, राजस्थान री शान।
जयपुर जेङो नगर अठै, सैलानियां री जान।।
अरावली पर्वत ऊंचा घणा, कांई म्हे करां बखान।
राजकनाळ लाम्बी घणी, मरुधर रो वरदान।।
चेतक तुरंग हठीलो घणो, भामाशाह महादानी।
सांगा हिन्दू लाज बचावणा, जौहर पद्मण रानी।।
ढोला मरवण प्रेम कहाणी, गावै कवि सुजान।
आल्हा ऊदल वीर कहाणी, चारण करै बखान।।
जैपुर कोटा अर् बीकाणा, जग में मान बढावै।
अलवर उदैपुर जोधाणा भी, राजस्थान री शान कहावै।।
गोगामेङी गोगो धुकै, रुणेचा रामदेव जी।
सालासर हनुमानजी बैठ्या, कोळू पाबूदेव जी।।
पल्लु में काळका माता, देशनोक में माँ करणी।
सुन्धा परबत री सुन्धा माता, तीनूं लोक दुख हरणी।।
राठी गौ री शान प्यारी, बैल नागौरी चोखा घणा।
नसल ऊंट री एक जाणी, बीकाणै में जो नाचणा।।
घूमर घालै गोरियां, माणस बजावै चंग।
होळी खेलै देवर भाभी, उङै कसूमल रंग।।
जयपुर में गणगौर सवारी, राजसी ठाठ दिखावै।
दशहरो मेळो कोटा रो, धरमी मान बढावै।।
साफा अठै जोधपुर रा, परदेशां कीर्ति बखाणै।
मोचङी भी न्यारी-न्यारी, देशोदेश जाणै।।

Friday, 6 February 2015


                           गाँव मुझे तेरी बहुत याद आती है
गाँव मुझे तेरी बहुत याद आती है..
तेरी वो मिट्टी की महक और चिड़ियाओं की चहक
तेरे वो ऊँचे ऊँचे रेत के टीले जो कभी ना हो गीले
तेरे पेड़ो की वो ठंडी और गहरी छाया
जिनके नीचे बैठकर तृप्त हो जाये काया
वो ढ़लते सूरज की लालिमा अमावस्या रात की कालिमा
वो कहानी सुनाती दादीमा वो खाना बनाती बहन सालिमा
इन सब की रह रहकर यादे आती है
गाँव मुझे तेरी बहुत याद आती है।
वो बरगद के पेड़ पर रस्सी से बना झूला
याद आता है तो ख़ुशी से नही समता मै फुला
आम खाने उन पेड़ो पर छुप छुप के चढ़ना
और माली को आता देख वहा से भगना
भगते भगते गिर के चोट खाना
फिर बाबूजी का डाटना और माँ का समझाना
ये यादे मुझे बहुत सताती है
गाँव मुझे तेरी बहुत याद आती है
वो मोटी मोटी मक्के की रोटियों पे पड़ी सरसों की साग
जितना खाता हूँ इनको मै उतनी ही बढ़ जाती है लाग
वो तेरे यहाँ बनता दाल बाटी चूरमा
खाकर के उसे जो बन जाये शूरमा
तेरे खाने का तो मैं हमेशा रहूँगा कायल
याद आता है जब भी मुझे कर देता है घायल
नाम लेते ही इन पकवानो का मुझे भूख लग जाती है
गाँव मुझे तेरी बहुत याद आती है
शाम होते ही जंगल से गायों का चरकर भागते हुए आना
और भाग भागकर कच्चे रास्तो पर मिट्टी और धूल उड़ाना
सूर्यास्त होते ही गोधूलि वेळा का आ जाना
और बाड़ो में बंधे सभी बछड़ो का एक साथ रंभाना
किसान का आकर के उन्हें खोलना,खुलते ही माँ के थन से जाके चिपक जाना
और ऐसे जताना जैसे उसे मिल गया हो कुबेर का खजाना
फिर किसान का गाय से दूध निकालना और चाय बनाकर घर आये मेहमानो को बड़े प्यार से पिलाना
वैसी प्यार भरी चाय की चुस्की यहाँ दिल्ली में नही मिल पाती है
गाँव मुझे तेरी बहुत याद आती है
वो मिट्टी और घास फुस से बना खपरेल का घर
जिसे किसी किसान ने बनाया बहुत मेहनत कर
उस कच्चे घर में बारिश का पानी चू चू के टपकना
जिसे देख चारपाई पे लेते किसान का आँखे झपकना
पोष की सर्दी में आई ठंडी हवा उसके ख़ून को जमा जाती है
और ज्येष्ठ में आई पुरवाई उसके अरमानो को ठंडा कर जाती है
गाँव मुझे तेरी बहुत याद आती है
वो लम्बे चौड़े आदमियों के सिर पर बंधा साफा
जिन्हें देखकर लगता है होगा इनमे बहुत आपा
उन्हें कोई मतलब नही होता दुनियादारी से
वो तो बस जीते और मरते है ख़ुद्दारी से
एक दूसरे से मिलकर और हँसते हँसते जीते है
भले ही जहर कितना हो जिन्दगी में उसे घुट घुट के पीते है
उनकी बस एक ही कमजोरी है वो है कर्ज
जिसका शायद अभी तक नही है कोई मर्ज
कब उबरेंगे ये कर्ज से मुझे ये चिन्ता खाती है
गाँव मुझे तेरी बहुत याद आती है
मै सिंटू बन्ना परदेश में रहकर गांव को नही भूल पाउँगा
रो रोके रोज खुद को दिलासा देता हूँ की एक दिन आयेगा जब मै वापस अपने गाँव जाऊँगा।

Saturday, 13 December 2014

               

                                           दरद दिसावर



लोग जाणै कायदा ना जाणै अपणेस  
राम भलाईँ मौत दे मत दीजै प्रदेश || 

ना सुख चाहु सुरग रो नरक आवसी दाय। 
म्हारी माटी गांव री गळियाँ जै रळ जाय॥ 

जोगी आयो गांव सूँ ल्यायो समचार  
काळ पड्यो नी धुक सक्यो दिवलाँ रो त्युहार्  

इकतारो अर गीतडा जोगी री जागीर  
घिरता फिरता पावणा घर घर थारो सीर  

जोगी बंतल कराँ पूछा मन री बात  
उगता हुसी गांव मँ अब भी दिन अर रात  

जमती हुसी मैफलाँ मद छकिया भोपाळ  
देता हुसी आपजी अब पी कै गाळ  

दारू पीवै आपजी टूट्यो पड्यो गिलास  
पी कै बोलै फारसी पड्या एक किलास  

साँझ ढल्याँ नित गाँव री भर ज्याती चौपाळ  
चिलमा धूँवा चालती बाताँ आळ पताळ  

पाती लेज्या डाकिया जा मरवण रै देश  
प्रीत बिना जिणो किसो कैजे सन्देश  

काळी कोसा आंतरै परदेशी री प्रीत  
पूग सकै तो पूग तूँ नेह बिजोगी गीत  

मरवण गावै पीपली तेजो गावै लोग  
मै बैठयो परदेश मँ भोगू रोग बिजोग ।। 

सावण आयो सायनी खेता नाचै मोर  
म्हारै नैणा रात दिन गळ गळ जावै मोर

जद तू मिलसी बेलिया करस्यूँ मन री बात
बध बध देस्यू ओळमा भर भर रोस्यूँ बाँथ

पैली तारिख लागताँ जागै घर भाग
मनियाडर री बाट मँ बाप उडावै काग

फागण राच्यो फोगला रागाँ रची धमाल
चाल सपन तूँ गाँव री गळीयाँ मँ ले चाल

घर, गळियारा, सायना, सेजाँ सुख री छाँव्
दो रोट्या रै कारणै पेट छुडावै गाँव

चैत चुरावै चित्त नै चित्त आयो चित्तचोर
गौर बणाती गौरडी खुद बणगी गणगौर

चपडासी है सा रो बूढो ठेरो बाप
बडै घराणै भोगरयो गेल जनम रा पाप॥

बेली तरसै गांव मँ मन मँ तरसै हेत
घिर घिर तरसै एकली सेजाँ मँ परणेत

भाँत भाँत री बात है बात बात दुभाँत
परदेशाँ रा लोगडा ज्यूँ हाथी रा दांत

गळै मशीनाँ मँ सदा गांवा री सै मौज
परदेसाँ मै गांगलो घर रो राजा भोज

बैठ भलाईँ डागळै मत कर कागा कांव
चित चैते अर नैण मँ गूमण लागै गांव ।।

बडा बडेरा कैंवता पंडित और पिरोत।
बडै भाग और पुन्न सूँ मिलै गांव री मौत |

लोग चौकसी राखता खुद बांका सिरदार
बांकडला परदेस मँ बणग्या चौकीदार

मरती बेळ्या आदमी रटै राम र्रो नांव
म्हारी सांसा साथ ही चित्त सू जासी गांव

मै परदेशी दरद हूँ तू गांवा री मौज
मै हू सूरज जेठ रो तूँ धरती आसोज॥

बेमाता रा आंकङा मेट्या मिटे नै एक
गूंगै री ज्यू गांव रा दिन भर सुपना देख

दादोसा पुचकारता दादा करता लाड
पीसाँ खातर आपजी दियो दिसावर काढ ।।

मायड रोयी रात भर रह्यो खांसतो बाप
जिण घर रो बारणो मै छोड्यो चुपचाप

जद सूँ परदेसी हुयो भूल्यो सगळा काम
गांवा रो हंस बोलणौ कीया भूलू राम

गरजै बरसै गांव मै चौमासै रो मेह
सेजा बरसै सायनी परदेसी रो नेह

कुण चुपकै सी कान मै कग्यो मन री बात
रात हमेशा आवती रात नै आयी रात


आंगण मांड्या मांडणा कंवलै मांड्या गीत
मन री मैडी मांडदी मरवण थारी प्रीत

दोरा सोराँ दिन ढल्यो जपताँ थारो नाम
च्यार पहर री रात कीयाँ ढळसी राम

सांपा री गत जी उठी पुरवाई मँ याद
प्रीत पुराणै दरद रै घांवा पडी मवाद

नैण बिछायाँ मारगाँ मन रा खोल कपाट
चढ चौबारै सायनी जोती हुसी बाट

प्रीत करी गैला हुया लाजाँ तोङी पाळ
दिन भर चुगिया चिरडा रात्यु काढी गाळ

पाती लिखदे डाकिया लिखदे सात सलाम
उपर लिख दे पीव रो नीचै म्हारो नांम

दीप जळास्यु हेत रा दीवाळी रो नाम
इण कातिक तो घराँ ! परदेसी राम

जोबण घेर घुमेर है निरखै सारो गांव
म्हारै होठाँ आयग्यो परदेसी रो नांव

जीव जळावै डाकियो बांटै घर घर डाक
म्हारै घर रै आंगणै कदै देख झांक

मैडी उभी कामणी कामणगारो फाग
उडतो सो मन प्रीत रो रोज उडावै काग

बागाँ कोयल गांवती खेता गाता मोर
जब अम्बर मँ बादळी घिरता लोराँ लोर

बाबल रै घर खेलती दरद जाण्यो कोय
साजन थारै आंगणै उमर बिताई रोय

बाबल सूंपी गाय ज्यूँ परदेसी रै लार
मार एक बर ज्यान सूँ तडपाके मत मार

नणद,जिठाणी,जेठसा दयोराणी अर सास
सगलाँ रै रैताँ थका थाँ बिन घणी उदास

सुस्ताले मन पावणा गांव प्रीत री पाळ
मिनख पणै रै नांव पर सहर सूगली गाळ

सहर डूंगरी दूर री दीखै घणी सरूप
सहर बस्याँ बेरो पडै किण रो कैडो रूप

खाणो पीणो बैठणो घडी नही बिसराम
बो जावै परदेस मँ जिण रो रूसै राम || 

कीडी नगरो सहर है मोटर बंगला कार
जठै जमारो बेच कै मिनख करै रूजगार

अजब रीत परदेस री एक सांच सौ झूँठ
हँस बतळावै सामनै घात करै पर पूठ

खेत खळा अर रूंखडा बै धोरा बै ऊंट
बाँ खातर परदेस के तज देवूँ बैकूँट

देह मशीना मै गळै आयो मौसम जेठ
बिरथा खोयी जूण म्हे परदेसा मँ बैठ ।।

ऊमस महीना जेठ रो बो पीपळ रो गांव
संगळियाँ संग खेलता चोपङ ठंडी छाव

गाता गीत गा सक्या करता करया कार
जीतै जी ना जी सक्या मरिया पडसी पार


ठीडै ठाकर ठेस रा ठीडै ही ठुकरेस
बिना ठौड अर ठाईचै क्यूँ भटकै परदेस

समरथ जाणु लेखणी सांचो जाणू रोग
गावैला जद चाव सूँ दरद दिसावर लोग ।।

सूना सा दिन रात है सूनी सूनी सांझ
बंस बध्यो है पीर रो खुशिया रै गी बांझ ।।

हिरण्याँ हर ले नीन्द नै किरत्याँ कैदे बात
तारा गिणता काटदे नित परदेसी रात

रिमझिम बरसै भादवो झरणा री झणकार
परदेसी रै आन्गणै रूत लागी बेकार

साखीणो संसार है कद तक राखा साख
साख राखताँ गांव मँ मिटगी खुद री साख

तन री मौज मजूर हा मन री मौज फकीर
दोनूँ बाताँ रो कठै परदेसाँ मँ सीर

ऊंचा ऊंचा माळिया ऊची ऊंची छांव
महला सूँ चोखो सदा झूंपडियाँ रो गांव

बाट जोंवता जोंवता मन हुग्यो बैसाख
छोड प्रीत री आस नै प्रीत रमाली राख

जद सूँ छोड्यो गांव नै हिवडै पडी कुबाण
गीत प्रीत री याद मँ आवै नित मौकाण

प्रीत आपरी सायनी होगी म्हारै गैल
भारी पडज्या गांव नै जिया कंगलौ छैल॥

प्रीत करी नादान सूँ हुयो घणो नुकसान
आप डूबतो पांडियो ले डूब्यो जुजमान

हेत कामयो देश मँ परदेसा मँ दाम
किण री पूजा मै करू गूगो बडो राम

बाबो मरगो काळ मै करग्यो बारा बाट
घर मँ टाबर मौकळा कै करजै रो ठाठ

मारै आह गरीब री करदे मटिया मेट
पण कंजूसी सेठ रो रति ना सूकै पेट

किण नै देवाँ ओळमाँ किण नै कैँवा बात
टाबरियाँ रै पेट पर राम मार दी लात
सूका सूका खेतडा पण नैणा मै बाढ
घर मँ कोनी बाजरी ऊपर सूँ दो साढ

जद सूँ पाकी बाजरी काचर मोठ समेत
दिन भर नापै चाव सूँ पटवारी जी खेत

फिर फिर आवै बादळी घिर घिर आवै मेह
सर सर करती पून मँ थर थर कांपै देह

होगी सोळा साल री बेटी करै बणाव
कद निपजैली टीबडी कद मांडूला ब्याव

टूटी फूटी झूँपडी बरसै गरजै गाज
इण चौमासै रामजी दोराँ रहसी लाज

टाबर टीकर मोकळाँ करजै री भरमार
राम रूखाळी राखजै थाँ सरणै घरबार

निरधनियाँ नै धन मिल्यो रोजणख्याँ नै राग
राम बता कद जागसी परदेसी रा भाग

उगतो पिणघट ऊपराँ सुणतो मिठी बात
गळी गुवाडी घूमतो चान्दो सारी रात

ना पिणघट ना बावडी ना कोयल ना छाँव
तो भी चोखो सहर सूँ म्हारो आधो गांव

सांझ ढळ्याँ नित जांवता देखै सारो गांव
पिरमा थारी लाडली पटवारी रै ठांव

पैली उठती गौरडी पाछै उठती भोर
झांझर कै ही नीरती सगळा डांगर ढोर

छैल सहर सूँ बावडै खरचै धोबा धोब
पडै गांव मै रात दिन पटवारी सा रोब

जद मन तरस्यो गांव नै जद जद हुयो अधीर
दूहा रै मिस मांडदी परदेसी री पीर

प्रीत आपरी अचपळी घणी करै कुचमाद
सुपना मै सामी रवै जाग्या आवै याद

पाती लिख रियो गांव नै अपरंच समचार
दुख पावुँ परदेस मँ जीवूँ हूँ मन मार

राग रंग नी आवडै कींकर उपजै तान
घर मै कोनी बाजरी अर टूट्योडी छान

घर दे घर रूजगार दे घर घर री दे साख
ना देवै तो सांवरा जीवण पाछो राख

बिन हरियाळी रूंखडा घरघूल्या सा ठांव
राहीदीखै दूर सूँ थारो आधो गांव

लेग्या तो हा गांव सूँ कंचन देही राज
पाछी ल्याया सहर सूँ खांसी कब्जी खाज

गाय चराती छोरडयाँ जोबन सूँ अणजाण
देख ओपरा जा लूकै कर जांटी री आण ।।

जोध जुवानी बेलड्याँ मिलसी करयाँ बणाव
आखडजै मत पावणा पगडंड्या रै गांव

के तडपासी बादळी के कोयल री कूक
पैली ही सूँ काळजो हुयो पड्यो दो टूक

अजब पीर परदेस री मर जीवै जीव
घर मै तरसै गोरडी परदेसाँ मै पीव ।।

ना आंचळ ना घूंघटो ना हीवडै मै लाज
घिरसत पाळै गोरडी रोटी पोवै राज

घाटै रो घर दे दिये दुख दीजै अणचींत
मतना दीजे सांवरा परदेसी री प्रीत

धान महाजन रै घराँ ढोर बिक्या बे दाम
करज पुराणो बाप रो कीयाँ चुकै राम

बेटो तो परदेस मै घर बूढा मा बाप
दोनो पीढी दो जघाँ दुख भोगै चुपचाप

ठाला बिन रूजगार कै ताना देता लोग
भरी अब तक गांव सूँ मनस्या बळण जोग

जद जासी परदेस तूँ हुसी जद बरबाद
दरद दिसावर कडया रोज करैलो याद

कितरा ही दुहा लिखूँ अकथ रहीज्या भाव
परदेसी रो दरद तो है गूंगै रो भाव